प्रिय गाँव मेरे तू चल

प्रिय गाँव मेरे तू चल , तेरे शहर में क्या रखा है
यहाँ बोतलों में शहद , वहां बोलियों में भरा है ……………!!!

उस दिन जब आई थी बरसात तेज हवाओ वाली
आँगन में ही छूट गए थे लोटा ,चिमटा, थाली !
दौड़ के तूने बड़े चाव से रखा था जो छत पर
सारी रात घुमड़ कर बरसा फिर भी तेरा बर्तन खाली
मेरे गाँव का सीडी दार कुआ ,देख मुहँ तक भरा है !!!
प्रिय गाँव मेरे तू चल , तेरे शहर में क्या रखा है
यहाँ बोतलों में शहद , वहां बोलियों में भरा है ………………………!!!

ना भंवरे , न पवन झकोरे , ना तितली ही आती ,
गमलों में तू फूल खिला, ये कैसा सावन लाती !
तेरे नरम मुलायम मिटटी हो ना सकी उपजाऊ
गाँव के मंदिर पीपल फुट भेद दिवार की छाती
जहाँ बंधती है मेरी गाय , वो ठूठ तक भी हरा है !!!!
प्रिय गाँव मेरे तू चल , तेरे शहर में क्या रखा है
यहाँ बोतलों में शहद , वहां बोलियों में भरा है……………………!!!

पीपल पत्थर पूजे ,मांगे अच्छे वर की मनोती ,
भोली लड़किया , देवलोक को दे देती है चुनोती ,
तू है मानती प्रेम वेदना Velentine day में ,
वो है मानती फाग रंग को अपनी प्रेम बपोती
उसके विश्वास का सोना , देख कितना खरा है !!!
प्रिय गाँव मेरे तू चल , तेरे शहर में क्या रखा है
यहाँ बोतलों में शहद , वहां बोलियों में भरा है ………………….!!!

2 comments:

सजीव सारथी said...

नए ब्लॉग की बधाई, बहुत सुंदर और सराहनीय प्रयास है आपका, हिन्दी चिट्टा जगत में आपका स्वागत है, सक्रिय लेखन कर हिन्दी को समृद्ध करें, शुभकामनाओ सहित
आपका मित्र -

सजीव सारथी
09871123997
www.podcast.hindyugm.com

Munda Sanichari said...

Ye sayad humne likhi hai :P

achcha blog ......badhayi !!!