मैं और मेरी तन्हाई...


आवारा है गलियों में मैं और मेरी तन्हाई
जाये तो कहाँ जाएँ हर मोड़ पे है रुसवाई
मैं और मेरी तन्हाई

यह फूल से पहरे हैं हँसते हुए गुलदस्ते
कोई भी नहीं अपना बेगाने हैं सब रास्ते
मैं और मेरी तन्हाई

अरमान सुलगते हैं सीने में चिता जैसे
कातिल नजर आती है दुनिया की हाय!जैसे
रोती है मेरे दिल पर बजती हुई शहनाई
मैं और मेरी तन्हाई

हर रंग में यह दुनिया सौ रंग बदलती है
रो कर कभी हंसती है हंस कर कभी गाती है
यह प्यार की बाहें हैं या मौत की अंगड़ाई
मैं और मेरी तन्हाई

आकाश के माथे पर तारों का चारगवां है
पहलू में मेरे मगर मेरे जख्मों का गुल्स्तान है
आँखों से लहू टपकता है दामन में बहार आई
मैं और मेरी तन्हाई||

Aaj Ashkon Ka Taar Toot Gaya,


Aaj Ashkon Ka Taar Toot Gaya,
Rishta-E-Intezaar Toot Gaya,

Yun To Thukra Ke Chal Diye Gye ,
Ek Khilona Tha Pyaar Toot Gaya,

Roye Reh Reh Kar Hichkiyaan Lekar,
Saaz-E-GaM Baar Baar Toot Gaya,

Aap Ki Berukhi Ka Shikwa Kya,
Dil Tha Na-Paidaar Toot Gaya,

Dekh Li Dil Ne Besabati-E-Gul,
Phir TilisM-E-Bahar Toot Gaya,

Kya Chaar Dinki Ranjish Se,
Itni Muddat Ka Pyaar Toot Gaya...

सच्चाई...


दिया कुछ इस तरह से जल गया
की पूरे घर में कालिख मल गया|
ढलेगी बाढ़,तो आयेंगे नेता
यह मत समझो की खतरा टल गया|
हंसी दुनिया के खींचे थे जो नक़्शे
हुई मुद्दत वह कागज गल गया|

दशहरा देखकर खुश हैं यह बच्चे
समझते हैं की रावण जल गया|

ना हारूँगा...

न पूछो की मेरी मंजिल कहाँ है
अभी तो सफ़र का इरादा किया है,
न हारूँगा हौंसला उम्र -भर
मैंने किसी से नहीं,
खुद से वादा किया है|

नये साल का आरम्भ शुभ हो...


जनवरी की पियरती धूप को
आँगन की तुलसी और
बाहर खड़े बरगद के वृक्ष को
पूरब के सूरज को
पश्चिम के चंदा को

बगल की तलैया को
रात को जुन्हैया को
नाले-नदी सागर को
पनघट के गागर को
कपिल और पूजा को
गाँव और देश को
साल और पलाश को
हरी सूखी घास को
वर्ष,दिन और मास को
छोटी-सी--चिड़िया को
बड़े -बड़े बाजों को
झूठे-सच्चे वादों को
कुछ नये इरादों को
अग्नि को,नीर को
तुलसी को,कबीर को
बिछिया को ,वेणी को
मालकिन को,मेहरी को
सांझ को,दोपहरी को
असाधू को,संत को
आदि को,अंत को
फूल को,बबूल को
सबको..!!हाँ सबको
नया साल शुभ हो!
नया साल शुभ हो!!